
मनेद्रगढ़/ आदिवासी जनजातियों की संस्कृति और शिक्षा के उन्नयन हेतु 4 दशकों कार्य कर चुके वरिष्ठ साहित्यकार सतीश उपाध्याय ने राष्ट्रीय जनजाति गौरव दिवस के परिप्रेक्ष्य में आदिवासी जननायक बिरसा मुंडा को देश के स्वतंत्रता संग्राम का आदिवासी जननायक निरूपित किया है।
आदिवासी ग्रामीण क्षेत्रों में, 6-14 साल के स्कूली बच्चों की स्कूली शिक्षा हेतु समर्पित रहे सेवानिवृत्त शिक्षक एवं साहित्यकार उपाध्याय ने , बिरसा मुंडा के जन्मदिन के अवसर पर उनके आंदोलन एवं जनजातीय संस्कृति में किए गए योगदान का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि देश के आदिवासी समुदायों की गौरवशाली सांस्कृतिक विरासत रही है, और स्वतंत्रता संग्राम में भी विशिष्ट योगदान रहा है। वरिष्ठ लेखक एवं सांस्कृतिक कर्मी सतीश उपाध्याय ने बतलाया कि बिरसा मुंडा ने अपने हक और संवैधानिक अधिकार के लिए आदिवासियों को-” जमीन हमारी माता” जैसा संदेश देकर जंगल एवं पर्यावरण एवं जनजाति संस्कृति को बचाए रखने का विशेष योगदान दिया है। बिरसा मुंडा को आदिवासियों के अधिकार का रक्षक और स्वतंत्रता संग्राम के सफल नायक के रूप में पहचाना जाता है। बिरसा मुंडा के नेतृत्व में औपनिवेशिक शासन के विरुद्ध देश के विभिन्न क्षेत्रों में बड़ी संख्या में आदिवासी समुदाय बिरसा मुंडा के निर्देशन में जनजाति स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गए थे एवं आदिवासियों की सांस्कृतिक विरासत इसके संरक्षण और गौरवशाली इतिहास बचाने के लिए आगे आए थे। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा ने आदिवासियों को संगठित करने शराब अंधविश्वास एवं ब्रिटिश शासकों के शोषण से दूर रहने का भी संदेश दिया था उन्होंने बरसा पंथ स्थापित कर जनजातियों को एकजुट रहने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि बिरसा मुंडा को देश भर के आदिवासी समुदाय भगवान मानते हैं, उन्होंने औपनिवेशिक व्यवस्था की शोषणकारी व्यवस्था के विरुद्ध देश में बहादुरी से लड़ाई लड़ी और,”उलगुलान क्रांति” का आवाहन किया था। उन्होंने बताया कि जनजाति गौरव दिवस प्रतिवर्ष 15 नवंबर को मनाया जाता है एवं इस दिन स्वतंत्रता संग्राम में आदिवासी समुदायों के नेतृत्व एवं योगदान का स्मरण किया जाता है। विभिन्न पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में शैक्षणिक गुणवत्ता के लिए 3 दशकों तक कार्य कर चुके वरिष्ठ सेवानिवृत्त शिक्षाविद एवं साहित्यकार ने कहा कि बिरसा मुंडा के योगदान को भारत का गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक विरासत उनके योगदान को मान्यता देता है। बिरसा मुंडा की जयंती उनके सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण वीरता एवं भारतीय मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए सदा याद किया जाता रहेगा।

