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राम वन गमन पथ से जुड़ा ‘बजरंग धाम छान्हीमाड़ा’—आस्था, प्रकृति और चमत्कार का अद्भुत संगम

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मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर।
जिले के जनकपुर क्षेत्र के समीप स्थित ‘राम वन गमन पथ’ से जुड़ा बजरंग धाम छान्हीमाड़ा आज श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र बन चुका है। जिला मुख्यालय एमसीबी से लगभग 122 किलोमीटर तथा जनकपुर नगर पंचायत से करीब 11 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थल प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक ऊर्जा और रहस्यमयी मान्यताओं का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है।

WhatsApp-Image-2026-04-05-at-2.22.07-PM-1024x768 राम वन गमन पथ से जुड़ा ‘बजरंग धाम छान्हीमाड़ा’—आस्था, प्रकृति और चमत्कार का अद्भुत संगम

चारों ओर पहाड़ों और घने हरे-भरे जंगलों से घिरा यह धाम पहली ही नजर में मन को मोह लेता है। यहां स्थापित लगभग 21 फीट ऊंची भगवान हनुमान की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई हर मनोकामना पूर्ण होती है, जिसके चलते छत्तीसगढ़ ही नहीं बल्कि मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं।
धाम परिसर में कई प्राचीन और अद्भुत धार्मिक चिन्ह मौजूद हैं। पत्थरों पर उकेरी गई भगवान गणेश की आकृति, भीम के पैरों के निशान, भगवान शंकर की आधारशिला, प्राकृतिक गुफाएं और अन्य दिव्य प्रतीक इस स्थल को रहस्य और आस्था से भर देते हैं। यहां का शांत वातावरण और प्राकृतिक सौंदर्य हर आगंतुक को आध्यात्मिक सुकून प्रदान करता है।

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स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, यह स्थल उस काल का साक्षी माना जाता है जब भगवान श्रीराम, माता सीता और लक्ष्मण वनवास के दौरान इस क्षेत्र से होकर गुजरे थे। इसी कारण यह स्थान ‘राम वन गमन पथ’ से जुड़ा अत्यंत पवित्र स्थल माना जाता है।
धाम में वर्षों से भक्ति और साधना की परंपरा निरंतर जारी है। यहां नियमित रूप से अखंड मानस पाठ, अखंड ज्योति और विशाल भंडारों का आयोजन होता है, जिससे पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना रहता है। विशेष रूप से प्रत्येक पूर्णिमा को यहां हजारों श्रद्धालुओं की उपस्थिति इस स्थान की लोकप्रियता को दर्शाती है।

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इस स्थल से जुड़ी एक रोचक मान्यता यह भी है कि यहां एक प्राचीन हांडा रखा हुआ है, जिसकी सुरक्षा मधुमक्खियां करती हैं। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि कोई भी व्यक्ति उसके समीप जाने का साहस नहीं कर पाता, जिससे यह स्थान और भी रहस्यमयी बन जाता है।
इतिहास की दृष्टि से भी यह धाम महत्वपूर्ण माना जाता है। बताया जाता है कि पहले यहां सीताराम बाबा निवास करते थे, जिनकी तपस्या और भक्ति ने इस स्थान को और अधिक पवित्र बना दिया। मंदिर की संरचना छान्ही (छप्पर) के आकार की होने के कारण इसे ‘छान्हीमाड़ा’ नाम दिया गया।

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वर्ष 2003 से यहां अखंड मानस और ज्योति का क्रम जारी है, जबकि वर्ष 2008 में वृंदावन से आए विद्वान पंडितों द्वारा विधि-विधान से हनुमान जी की विशाल प्रतिमा की स्थापना की गई थी।

WhatsApp-Image-2026-04-05-at-2.25.14-PM-1024x1024 राम वन गमन पथ से जुड़ा ‘बजरंग धाम छान्हीमाड़ा’—आस्था, प्रकृति और चमत्कार का अद्भुत संगम

आज बजरंग धाम छान्हीमाड़ा न केवल धार्मिक आस्था का प्रमुख केंद्र है, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक महत्व के कारण पर्यटन की दृष्टि से भी तेजी से उभर रहा है। यहां आने वाले श्रद्धालु एक ओर जहां आध्यात्मिक शांति का अनुभव करते हैं, वहीं दूसरी ओर प्रकृति की गोद में सुकून भरे पल बिताते हैं।

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