जनकपुर पुलिस: भ्रष्टाचार का उदाहरण, कार्य प्रणाली शून्य जनजातियों के ऊपर अत्याचार तो पत्रकारों को जान से मारने की धमकी

एस. के.‘रूप’
जनकपुर–एमसीबी/ जनकपुर परित्राणाय साधुनाम श्रीमद् भागवत गीता अध्याय ४ श्लोक ८ में श्री भगवान ने अर्जुन से कहा है कि :–
यदा यदा हि धर्मस्य ग्लानिर्भवति भारत।
अभ्युत्थानमधर्मस्य तदात्मानं सृजाम्यहम्।।
परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम्।
धर्मसंस्थापनार्थाय संभवामि युगे युगे।।”
इसका अर्थ है: “हे भारत, जब-जब धर्म की हानि होती है और अधर्म बढ़ता है, तब-तब मैं स्वयं को प्रकट करता हूँ। साधुओं (सज्जनों) की रक्षा करने के लिए, दुष्टों का विनाश करने के लिए और धर्म की स्थापना करने के लिए, मैं हर युग में अवतार लेता हूँ।”
भारत भारत देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था है, इसके स्तंभ है व्यवस्थापिका– कार्यपालिका– और न्यायपालिका! न्याय व्यवस्था की प्राथमिक धुरी थाना /कोतवाली है इस थाना कोतवाली में अकसर लिखा होता है “परित्राणाय साधुनाम” साधु सज्जनों के उद्धार के लिए। क्या यह थाने और इसके संचालनकर्ता सही और सार्थक रूप से भगवतगीता के इन दो शब्दों के अर्थ को समझ कर पालन करते हैं? अगर पालन होता तो अधिकतर मामले यही निपट जाते और बेकसूर निर्भयता के साथ जीवन जीते कई पुलिसकर्मी ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी ड्यूटी पूरी ईमानदारी से की है और वंदनीय होकर स्थापित हुए हैं लेकिन जनकपुर पुलिस वनांचल में अपनी कार्यप्रणाली के लिए बदनाम हो रही है क्षेत्र की जनता ही थाना पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए समझौते और धनपतियों के प्रभाव का अड्डा मान रही है लोगों का कहना है कि थाना में केवल समझौता और धनाढ्यों का बोलबाला है थाना में बैगा पांडे गोंड हरिजन आदि जनजातियों सहित गरीब बेसहारा जैसे वर्ग का कोई नहीं सुनता। वनांचल के संसाधनों के रक्षार्थ वीडियो बना रहे विगत 1 अगस्त को एक स्थानीय पत्रकार शिवम को मुरूम माफिया ने जान से मारने की धमकी तक दे डाली और कहा कि तेरे को खन के गाड़ दूंगा। उस पर कार्यवाही शून्य । रेंजर इंद्रभान पटेल और उसके कर्मचारियों के द्वारा विगत वर्ष पण्डो बैगा गोंड जनजाति के साथ मारपीट जातिगत गाली गलौज की गई रेंजर पर कार्यवाही नहीं होने से हौसला बढ़ा और झूठा आरोप रेंजर ने गांव वालों पर लगाते हुए उन्हें ही नोटिस भिजवा दी इसकी शिकायत की गई है।सामाजिक संस्था जनहित संघ अंतर्गत पण्डो विकास समिति इन भ्रष्ट अधिकारियों को किसी भी तरह बर्दाश्त नहीं करेगा और पूरे साक्ष्य प्रमाण के साथ कार्यवाही किया जाएगा। इसी तरह विगत 5 जून को सर्राफा व्यापारियों के साथ मार्ग में गोलीबारी हुआ लूटपाट की घटनाकारित हुई इस पर भी पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली है। छत्तीसगढ़ प्रदेश के और भारत देश के विशेष पिछड़ी जनजाति के अनुसूचित में शामिल जनजाति बैगा के साथ भी वनांचल में अत्याचार योजनाओं का लाभ नहीं मिलना मारपीट एवं जान से मारने की धमकी के कई मामले आए लेकिन कार्यवाही शून्य। विगत 1 जुलाई को इंद्र बहादुर बैगा से मारपीट की गई कार्यवाही शून्य। विगत चार जून को बैगा जनजाति के रामखेलावन बैगा और उसकी मां के घर में घुसकर मारपीट की गई कार्यवाही शून्य। पुलिस का कार्य है चोर को पकड़ना मामला तब हास्यप्रद हो जाता है जब चोर का पता हो और पुलिस उसे संदेह के आधार पर कड़ाई कर सच बाहर निकालने की जगह कहती है कि “वह कहता है नही किया है।”
कोई चोर ऐसे प्रेम से पूछने पर स्वीकार कभी नहीं करेगा कि वह चोर है और फलाने जगह चोरी किया है यह प्रकरण है ग्राम अख्तवार निवासी ललन बालंद का उसे पता है उसके घर पर रखा ₹१००००कौन चोरी किया है! उसने ताला तोड़कर निकलने तक का पूरा ब्यौरा दिया थाना जनकपुर में बताया की साब वही व्यक्ति आया था घर में सुनेपन का फायदा उठाया और रुपया लेकर फरार हो गया पर पुलिस का कहना है वह बोलता है वह नहीं चुराया है। हद है पुलिसिया कार्रवाई की।
इसी तरह अन्य कई मामले हैं जो इशारा करते हैं कि जनकपुर पुलिस के द्वारा मामलों को संगीन अपराध तक को परित्राणाय साधुनाम नहीं अपितु परित्राणाय दुष्टानम के तर्ज पर किया जा रहा है जो भारी चिंता का विषय है और बदनामी का कारण भी बन रहा है।जिला प्रमुख एवं पुलिस अधीक्षक को इस ओर ध्यानाकर्षण करते हुए न्याय व हित के लिए निर्देशित करना अनिवार्य है और ऐसे पुलिस कर्मचारी जो केवल सेटिंग या धनार्जन के लिए वर्दी को बदनाम कर रहे हैं उन्हें तत्काल निलंबित किया जाना जनहित में जरूरी हो गया है।



