
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर/ जिले के ग्रामीण इलाकों में सरकार ने बिजली संकट दूर करने के लिए भले ही सौर ऊर्जा प्रणाली तो लगा दी हो, लेकिन मेंटेनेंस के नाम पर विभाग की घोर लापरवाही आज भी जस की तस बनी हुई है। ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है भरतपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत बड़गांव खुर्द से यहां करीब 350 की आबादी वाला यह पूरा गांव पिछले तीन साल से अंधेरे के सहारे जीने को मजबूर है।

जंगलों से घिरे बड़गांव खुर्द में सौर ऊर्जा ही एकमात्र सहारा थी

जंगलों से घिरे बड़गांव खुर्द में सौर ऊर्जा ही एकमात्र सहारा थी। बच्चों की पढ़ाई, ग्रामीणों की सुरक्षा, जंगली जानवरों का खतरा… हर चीज इसी रोशनी पर निर्भर थी। लेकिन बीते तीन सालों से यहां लगा सोलर प्लांट खराब पड़ा है और विभाग के अधिकारी हाथ पर हाथ धरे बैठे हैं।

ग्रामीणों का आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि “सरकार ने तो बिजली का इंतजाम कर दिया, पर सिस्टम में बैठे लोग उसे चलाने तक की जिम्मेदारी निभाना नहीं चाहते।”
अधिकारी की लापरवाही

जब मामले की गंभीरता देखते हुए क्रेडा विभागीय ऑफिस पहुंचे, तो वहां अधिकारी नदारद मिले। फोन लगाया गया तो कॉल रिसीव करना भी उन्होंने जरूरी नहीं समझा। पत्रकारों के फोन से बचने की कोशिश, ऑफिस में गायब रहने की आदत और फील्ड पर कभी न पहुंचने का रवैया… ये सब मिलकर साफ कर रहा है कि सिस्टम में बैठे जिम्मेदार सिर्फ फाइलों पर खानापूर्ति कर रहे हैं और गांव के विकास में जीरो योगदान दे रहे हैं।
ग्रामीणों की दर्दभरी बात

बीरबल (ग्रामीण) ने कहा कि “हम लोग जंगल में रहते हैं, जंगली जानवरों का खतरा हमेशा बना रहता है। अंधेरे में तो हम लोग घर से बाहर निकलने से डरते हैं।”
रमा यादव (ग्रामीण महिला) ने कहा कि “हम लोग रात में घर से बाहर नहीं निकल पाते। बच्चों की पढ़ाई भी अंधेरे में नहीं हो पाती। हमें बहुत परेशानी होती है।”
दयाशंकर सिंह (पूर्व सरपंच) ने कहा कि “हम लोग तीन साल से अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। सरकार ने सोलर प्लांट लगाया था, लेकिन वह भी खराब पड़ा है।”
क्या बड़गांव खुर्द दो साल बाद भी अंधेरे में ही डूबा रहेगा?
क्या प्रशासन जागेगा और गांव के सोलर सिस्टम को दुरुस्त कर लोगों को अंधकार से राहत दिलाएगा? यह सवाल अब ग्रामीणों के दिलों में है।



