कोरियासरगुजा संभाग

अमृतकाल में मूलभूत सुविधाओं का मोहताज बना ग्राम रेवला

क्या संभाग का पहला विद्यालय विहीन ग्राम है रेवला ? बच्चे हैं पर विद्यालय नही?

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सड़क,बिजली, स्वच्छ पानी का पूर्णतः अभाव, नाले के पानी से बुझ रही प्यास

शासन की जन कल्याणकारी योजनाओ से कोसो दूर है ग्राम रेवला

अंधेरे में बिताते हैं रात ,गांव में सौर ऊर्जा प्लांट भी नही, 5 साल पहले मिला होम लाइट भी खराब,सड़क नही धान नही बेच पाते,स्वास्थ्य सुविधा नही, उबका ढोंढी का पानी पीते है ग्रामीण, जनजीवन मिशन केवल कागज में पूर्ण, संचार सुविधा का अभाव।

तबियत खराब होने पर खाट में कंधे के सहारे लाते हैं मुख्य सड़क तक

ग्रामीणों की एक ही मांग सड़क बनवा दे सरकार

रेवला के ग्रामीणों ने घटती घटना को बताई गांव की समस्याएं

पिछली सरकार में लगा बी एस एन एल टावर पर अभी तक चालू नहीं

राजन पाण्डेय

कोरिया /हर साल छत्तीसगढ़ विकास की सीढ़ियां चढ़ रहा है. लेकिन प्रदेश के कोरिया जिले का एक गांव आज भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है. डिजिटलीकरण और विकास के इस दौर में भी सोनहत तहसील के रेवला गांव में ग्रामीणों के जीवन में विकास की रौशनी अब तक नहीं पहुंच सकी है. यहां 50 से अधिक लोग निवासरत हैं, जिन्हें अब तक बिजली, सड़क और पीने को शुद्ध पानी तक नहीं मिल सका. विकास का ढोल पीटने वाले जनप्रतिनिधि और प्रशासन भी ग्रामीणों की कोई मदद नहीं कर सके. कई बार शासन-प्रशासन से गुहार लगाने के बाद भी गांव में समस्या जस की तस बनी हुई है.

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आज हम आपको बताने जा रहे है एक ऐसे गांव के बारे में जो गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान के सघन जंगलों के बीच चारो तरफ पहाड़ों के बीच खाई में बसा हुआ है। इस गांव को रेवला के नाम से जाना जाता है। यहां पर पंडो एवं चे रवा जनजाति के “परिवार निवास करते हैं। यह गांव काफी लंबे समय से यहां बसा हुआ है मूल भूत सुविधाओ से कोसो दूर बसे इस गांव के लोग विकास की परिभाषा नही जानते और बगैर सड़क बिजली पानी के बिना किसी संसाधन के यहां रहने मजबूर है। इस गांव का रास्ता इतना भयावह है कि यहां कोई चार पहिया वाहन नही जा सकता यहां जाने के लिए आपको पैदल ही जाना होगा यदि आप बाइक में भी जाने की सोच रहे है तो पगडंडियों के सहारे बहुत सावधानी बरतें हुए आपको यहां पहुचना पड़ेगा।

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रेवला में बच्चे हैं पर नही है कोई भी स्कूल
रेवला के ग्रामीणों ने घटती घटना से अपनी समस्या बताते हुए कहा कि रेवला गांव में स्कूली बच्चो की संख्या 15 के आसपास है बावजूद इसके यहां कोई भी स्कुल नही है जबकि सोनहत विकासखण्ड में कई स्कूल ऐसे हैं जिनमे दर्ज संख्या 10 या उससे भी कम है लेकिन इस गांव में स्कुल नही होने से यहां के लोग शिक्षा व्यवस्था का लाभ सही ढंग से नही ले पा रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि यहां से सबसे नजदीकी प्राथमिक शाला मेण्ड्रा गांव में है जिसकी दूरी 20 किलोमीटर है जबकि पँचायत मुख्यालय कछाड़ी है जिसकी दूरी लगभग 35 किलोमीटर यहां के बच्चे मेण्ड्रा ,सोनहत और तेलीमुड़ा के आश्रम शालाओं में पढ़ते हैं, ग्रामीण अभिभावकों ने बताया कि बच्चो से मिलने जाने और अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए भारी मशक्कत होती है ऐसे में यदि गांव में ही स्कूल हो जाता तो काफी राहत होती है।

स्वास्थ्य सुविधाओ की बड़ी परेशानी
रेवला में स्वास्थ्य सुविधाओं के नाम पर बड़ी परेशानी है ग्रामीणों ने बताया कि तबियत खराब हो जाने पर बहुत ज्यादा परेशानी हो जाती है। एम्बुलेंस गांव तक पहुचती नही और ग्रामीणों के पास कोई साधन नहीं ऐसे में इलाज कराना बेहद कठिन हो जाता है। ग्रामीण बताते है कि तबियत खराब होने या फिर महिलाओं को प्रसव के समय खाट पर कंधे के सहारे भीषण चढ़ाई चढ़ मुख्य सड़क तक लेकर जाते हैं इसके बाद एम्बुलेंस या फिर अन्य संसाधनों से अस्पताल तक पहुचाया जाता है। हालांकि ग्रामीण महिलाओ ने बताया कि यहां स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेने स्वस्थ्य कार्यकर्ता आते हैं चिरायु की टीम भी आयी है जो आंगन बाड़ी के बच्चो को दवाई वगैरह दिए थे लेकिन इनके अलावा कोई भी अन्य विभाग का अधिकारी कर्मचारी यहां लोगो की सुध लेने नही आते जिससे किसी भी योजनाओं का लाभ नही मिल पाता है।

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धान उगाते हैं पर बेंच नही पाते
ग्रामीणों ने बताया उनके आय का मुख्य साधन कृषि और पशुपालन है ग्रामीणों ने बताया कि वो धान उगाते हैं पर बेच नही पाते, भूमि का राजस्व पट्टा भी है लेकिन सड़क इतनी खराब है कि धान लेकर सहकारी समिति तक जाना सम्भव नही है। किसी भी ग्रामीण के पास के सीसी नही है न ही किसान का पंजीयन किसानों को इसके बारे में ज्यादा जानकारी भी नही है इस कारण इन्हें उचित मूल्य पर सहकारी समिति से खाद व बीज भी नही मिल पाता है, ग्रामीण बताते है कि पटवारी साहब साल में एक बार गिरदावरी के समय आते है और कभी कभार जंगल विभाग के बीट गार्ड इनके अलावा न तो यहां कोई अधिकारी कर्मचारी आते और न ही कोई जनप्रतिनिधि

गांव में सौर ऊर्जा का प्लांट भी नही,होम लाइट भी खराब
सोनहत क्षेत्र के अधिकांश विद्युत विहीन ग्रामो में सौर का प्लांट लगा है लेकिन रेवला गांव इससे भी अछूता रह गया यहां रात्रि के समय भारी समस्या हो जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव में सौर ऊर्जा प्लांट नही है, 5 साल पहले क्रेडा विभाग के माध्यम से होम लाइट दिया गया था जो अब खराब हो गया है जिसके बाद अब रोशनी का कोई विकल्प नही बचा है, टॉर्च और दिया बाती से किसी प्रकार गुजरा करते हैं। ग्रामीणों ने कहा कि हमारे ग्राम में सौर ऊर्जा प्लांट लग जाता तो काफी राहत हो जाती

जल जीवन मिशन के नाम पर छलावा, नाले का पानी पीना मजबूरी

रेवला में जल जीवन मिशन के तहत पानी देने की योजना भी हवाई फायर की तरह निकली ग्रामीणों ने बताया कि साल भर पहले पाइप लाइन लगाई गई लेकिन न टँकी बनी न ट्यूब बेल खोदा गया तो पानी कहाँ से मिलेगा , इसके बाद कोई देखने भी नही आया, ऐसी स्थिति में शिकायत करें भी तो किस्से , फिलहाल पेय जल की कोई व्यवस्था नही है नाले का गंदा पानी पीना मजबूरी है क्योंकि गांव एक अदद हैंड पम्प तक नही है इस कारण प्राकृतिक संसाधनों पर ही जीवन का गुजर बसर चल रहा है।

कोरिया जन सहयोग समिति सड़क व पानी के लिए उठाएगी आवाज-पुष्पेंद्र

कोरिया जन सहयोग समिति के अध्यक्ष पुष्पेन्द्र राजवाड़े और सदस्य बालकरन ,मोहन प्रसाद भी ग्राम का दौरा किए। पुष्पेंद्र राजवाड़े ने बताया कि रेवला की भगौलिक परिस्थिति बहुत विषम है इस कारण यहां की स्थिति काफी खराब है उन्होंने कहा कि रेवला के बच्चो को गांव में ही प्राथमिक स्तर की शिक्षा मिले इसके लिए वो शासन प्रशासन से मांग करेंगे, जब खण्ड स्तर और 10 से कम दर्ज संख्या के कई स्कूल है तो रेवला के 15 बच्चो के लिए स्कूल क्यों नही खोला जा सकता , उन्होंने कहा कि सड़क की स्थिति ठीक करने जिला प्रशासन व पार्क परिक्षेत्र कार्यालय में मांग किया जाएगा ताकि ग्रामीणों का आवागमन ठीक हो सके,

पिछली सरकार में लगा मोबाइल टावर चालू नही
ग्रामीणों ने बताया कि पिछली सरकार के समय ही रेवला में बी एस एन एल मोबाइल टावर का कार्य शुरू हुआ था , कार्य पूर्ण भी हुआ पर काफी दिन हो गए अभी तक चालू नही हुआ है। ग्रामीणों ने बताया कि टावर से मशीन चलने की आवाज आती है पर मोबाइल में सिग्नल नही आता यदि मोबाइल टावर भी चालू हो गया तो लोग कम से कम संचार सेवा से जुड़ जाएंगे।

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