कोरिया

वन विभाग बैगा जनजाति के प्रधानमंत्री आवास पर चला वन विभाग का बुलडोज़र

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मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर/भरतपुर विकासखंड के ग्राम भगवानपुर में विशेष पिछड़ी जनजाति बैगा समुदाय के गरीब परिवारों के आवासों को वन विभाग द्वारा जेसीबी मशीन से तोड़े जाने की घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। राष्ट्रपति के दत्तक पुत्र घोषित बैगा समुदाय के साथ इस प्रकार से की गई घटना बेहद दुर्भागजनक और चिंताजनक है वन विभाग ऐसे ही किसी समुदाय से उनका आशियाना नहीं छीन सकता है

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सावित्री ने बताया कि 20-25 साल पहले उन्हें घर बनाने के लिए कहा गया था, लेकिन अब वन विभाग ने उनका घर तोड़ दिया है। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले ही घर रोकवाने के लिए कहा था, लेकिन नोटिस जारी नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि शासन के द्वारा उन्हें मुआवजा दिया जाए और उनका घर बनवाया जाए। उन्होंने कहा कि वह जमीन देकर यहां सब छोड़ना चाहती हैं और अपने बच्चों के साथ कहीं और जाना चाहती हैं।

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राजेश ने बताया कि वह अपने बाल बच्चों को लेकर कहां जाएं और गुजारा कैसे करें। उन्होंने कहा कि उनकी मांग है कि शासन उन्हें रोजी-रोटी के लिए कुछ दे, जिससे वह अपने परिवार का पालन-पोषण कर सकें।

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सौरभ मिश्रा, जिला कांग्रेस प्रवक्ता, ने कहा कि जनकपुर के कुंवारपुर रेंज में बैगा परिवार के प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत स्वीकृत आवासों को वन विभाग ने बुलडोजर से गिरा दिया है। उन्होंने कहा कि जब आवास स्वीकृत हुए थे, तब वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी कहां थे? उन्होंने आरोप लगाया कि वन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी अपनी हिटलरसही और तानाशाही दिखा रहे हैं। सौरभ मिश्रा ने कहा कि यह घटना बेहद घोर निंदनीय है और कांग्रेस पार्टी इसकी कड़े शब्दों में निंदा करती है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कलेक्टर महोदय को इस संबंध में विशेष जांच करने के लिए मांग की है और दोषी कर्मचारियों और अधिकारियों के ऊपर कड़ी कार्रवाई करने के लिए आग्रह किया है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर उनकी बात नहीं सुनी जाती है, तो कांग्रेस पार्टी आगे की लड़ाई लड़ेगी।

पूर्व जिला पंचायत सदस्य भाजपा नेता एवम जिला पंचायत अध्य्क्ष पति रवि शंकर सिंह ने कहा कि सरकार का उद्देश्य है सब का घर पक्का हो, कोई गरीब कच्चा मकान में न रहे। उन्होंने कहा कि भगवानपुर के खचकरिपारा में सावित्री, राजेश के घर को वन विभाग ने तोड़ दिया है, जिन्हें प्रधानमंत्री आवास मिला था।रवि शंकर सिंह ने कहा कि जब घर बन रहा था तब क्यों नहीं रोका गया? जब घर पूर्ण होने की स्थिति में आया है तब इसे क्यों तोड़ा गया? उन्होंने कहा कि हितग्राही का बहुत नुकसान हुआ है और वन विभाग के द्वारा बहुत गलत किया गया है।
उन्होंने शासन प्रशासन से जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने कहा कि अगर वन विभाग की जमीन थी तो पहले क्यों नहीं ध्यान दिया गया? उन्होंने हितग्राही को नया आवास देने की मांग की है।

प्रदीप दूबे, परिक्षेत्र सहायक ने बताया कि वन भ्रमण के दौरान भगवानपुर बीट कक्ष क्रमांक पी 1293 में अवैध रूप से मकान बनते हुए पाए गए। राजेंद्र और कुंवारे बैगा ने बताया कि उन्हें प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिला है, लेकिन उनके पास कोई अधिकार पत्र या विधिक अभिलेख नहीं था।इसके बाद, उन्हें नोटिस दिया गया कि एक सप्ताह के अंदर अपना विधिक अभिलेख प्रस्तुत करें और निर्माण कार्य बंद करें, लेकिन उन्होंने निर्माण कार्य नहीं बंद किया। वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देशानुसार, भारतीय वन अधिनियम 1927 एवं वन संरक्षण अधिनियम 1980 के तहत अतिक्रमण हटाया गया।

ब्लॉक समन्वयक चंदन सिंह ने बताया कि उनके जॉइनिंग से पहले ही हितग्राही के आवास के लिए जियोटैग कर दिया गया था और उनके खाते में दो-तीन किस्त भी जा चुके थे। उन्होंने कहा कि वे वहां गए थे और पुराने आवास के बारे में दीपक सर से बात हुई है, जिन्होंने बताया कि वे चैक कर के बताएंगे।

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