
एस0के0 ‘रूप’
बैकुंठपुर/ स्थानीय जनमानस में विरोध के स्वर उत्पन्न हो रहे हैं कभी सड़क चौड़ीकरण के मुद्दे को लेकर कभी गलत निर्णयों के कारण जिसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। शहर अपने अस्तित्व के लिए जूझ रहा है, वही जनप्रतिनिधियों की चुप्पी भी लोगो को रास नहीं आ रही है।

ताजा मामला है नवीन पुलिस अधीक्षक कार्यालय भवन के लिए स्थल चयन को लेकर जो शासकीय रामानुज प्रताप सिंह देव स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर में है इसके पूर्व ग्राम पंचायत चेर में उक्त भवन बन रहा था मिली जानकारी के अनुसार स्टे लगने के बाद आनन फानन में प्रशासन द्वारा शा.रामानुज प्रताप सिंहदेव स्नातकोत्तर महाविद्यालय परिसर में नवीन भवन हेतु भूमि पूजन विगत दिनांक 27.8.2025 को कर दिया गया। जबकि महाविद्यालय प्रबंधन द्वारा लिखित एवं मौखिक रूप से उक्त भवन को महाविद्यालय परिसर में ना बनाने हेतु निवेदनार्थ जिला कलेक्टर को दिनांक 5/8/2025 को किया गया।महाविद्यालय द्वारा उच्चशिक्षा विभाग छत्तीसगढ़ शासन, मुख्यमंत्री एवं सचिव उच्चशिक्षा को भी पत्र प्रेषित किया गया जिसमें उल्लेखित है कि:–
“महाविद्यालय परिसर में प्रस्तावित पुलिस अधीक्षक कार्यालय निर्माण हेतु भूमि आबंटित न करने के संबंध मे, महाविद्यालय परिसर में स्थित मॉडल स्कूल की बिल्डिंग जो कि पूर्व में महाविद्यालय की पुरानी बिल्डिंग थी, जिसे शासकीय आदर्श उ० मा० विद्यालय बैकुण्ठपुर को संचालन हेतु दिया गया था। उक्त स्कूल के जमनीपारा में हस्तांतरित होने बाद स्कूल के द्वारा भवन महाविद्यालय को वापस किया गया, जिसमें महाविद्यालय की स्नातकोत्तर कक्षाएं है। एम० एससी० गणित, भौतिकी, एम० ए० इतिहास, भूगोल की 08 कक्षाएं संचालित हो रही।

विदित हो कि महाविद्यालय जिले का अग्रणी महाविद्यालय है एवं बी० ए०, बी० एससी०, बी० कॉम० स्नातक कक्षाओं के साथ 10 विषयों में स्नातकोत्तर की कक्षाएं संचालित है, साथ ही राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 लागू होने के कारण सेमेस्टर की कक्षाएं संचालित हो रही है। भविष्य में विद्यार्थियों की संख्या व स्नातकोत्तर कक्षाओं की संख्या बढ़ने की सम्भावना है। जिसके कारण क्लास रूम के लिए पहले से अधिक कक्षों की आवश्यकता होगी। आई० डी० पी० एवं राष्ट्रीय शिक्षा अभियान मद से भवन एवं ऑडिटोरियम निर्माण हेतु प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इस संबंध मे जब कलेक्टर महोदय से चर्चा की गई तो ज्ञात हुआ कि महाविद्यालय परिसर का यह भू-भाग महाविद्यालय को आबंटित नहीं हुआ है, इस कारण इसे पुलिस अधीक्षक कार्यालय बनने हेतु सौंपा जा रहा है। इस भूमि का खसरा नं. 288 है।
महोदय, अगर ऐसी ही बात थी, तो परिसर में स्थित यह भू-भाग महाविद्यालय एवं छात्र हित हेतु महाविद्यालय को सौंपा जाना चाहिए था। इस संबंध में तहसीलदार द्वारा सन 1987-88 में महाविद्यालय को प्रदाय करने हेतु अनुशंसा की गई थी। परन्तु राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मंशा के विपरित जो भूमि महाविद्यालय के पास सीमित रूप में उपलब्ध थी, उसे भी पुलिस अधीक्षक कार्यालय के नाम पर महाविद्यालय से वंचित किया जा रहा है।
माननीय महोदय से निवेदन है कि छात्र हित, राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के सफल क्रियान्वयन एवं शोध तथा अध्ययन के स्तर पर गुणवत्ता बनाऐ रखने हेतु महाविद्यालय परिसर में निहित भूभाग को महाविद्यालय के नाम से ही आबंटित करवाने की कृपा करें।
महाविद्यालय प्राचार्य एमसी हिमधर ने कहा कि हमारे द्वारा जिला कलेक्टर से इस संबंध में लिखित मौखिक रूप से भूमि आवंटित ना करने हेतु निवेदन किया गया उन्होंने कहा कि – दो पाली में महाविद्यालय चला लीजिए या भवन में डबल स्टोरी करके आपकी समस्या का समाधान हो जाएगा। स्थानीय विधायक ने भी प्रशासनिक कार्यों को सही ठहराया।
अब प्रश्न उठता है कि :–
महाविद्यालय में छात्रों की संख्या दिन प्रतिदिन बढ़ रही है भवन प्रसार की आवश्यकता है निर्माण कहां हो?
महाविद्यालय के छात्रों हेतु ऑडिटोरियम प्रशासनिक भवन का अभाव है इसकी पूर्ति कैसे होगी?
महाविद्यालय में 10 से अधिक विषयों में स्नातक स्नातकोत्तर की पढ़ाई हो रही है वर्तमान भवन में कमरे की कमी के कारण पढाई कैसे संभव है?
महाविद्यालय में पार्किंग आदि की व्यवस्था नहीं है वर्तमान में जो स्थल चयन किया गया है वह प्रवेशद्वार से लेकर महाविद्यालय से सटा दिया गया है ऐसे में बढ़ते छात्र संख्या और उनके वाहन हेतु पार्किंग कहां होगी?
महाविद्यालय भवन वर्षों पुराना है उक्त भवन में दो मंजिला इमारत कैसे बने,सुरक्षा की क्या गारंटी है ?
महाविद्यालय में वृहत बड़े आयोजन किस प्रकार से संभव हो सकेंगे ?
महाविद्यालय में सुव्यवस्थित खेल परिसर का निर्माण अधर में ही लटका रहेगा?
शैक्षणिक स्थल पर एसपी ऑफिस उसके सामने संकीर्ण तिराहा यातायात की समस्या को जन्म नहीं देगी ?
शहर का पुराना तहसील कोर्ट खंडहर में तब्दील हो गया है इसी तरह ऐतिहासिक रामानुज क्लब भी खंडहर में तब्दील हो गया है पुराना जिला सत्र न्यायालय का भी यही हाल है वास्तव में सिविल लाइन कहा जाने वाला यह क्षेत्र क्या अपना अस्तित्व खो देगा इन स्थलों को चिन्हांकित करके निर्माण क्यों नही?
थाना बैकुंठपुर में और पुलिस अधीक्षक का कार्यालय तलवापारा ग्राम पंचायत में गरीब बेसहारा पीड़ित व्यक्ति के लिए परेशानी का सबब नही बनेगा ??
स्थानीय पुलिस लाइन में भी भूमि का अभाव नहीं है बल्कि जनता को और सुविधा मिल जाती, थाना और एसपी कार्यालय आसपास ही बन जाते ।
शहर के विस्तार का अर्थ यह नहीं की शहर का ही अंत हो जाए ?
वर्तमान चयनित स्थल तलवापारा पंचायत में है क्या बैकुंठपुर मुख्यालय वीरान ही रहेगा?
क्या भट्टीपारा से थाना परिसर तक ही शहर सिमट गया है अगर यह विकास है तो विनाश उजाड़ व अव्यवस्था क्या है?



