मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर

ग्रामपंचयत सरपंच एवम उपसरपंच की सराहनीय पहल

सरपंच और उपसरपंच ने किया मिसाल कायम

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स्वयं के खर्च पर बनवाया सीसी रोड, बरसों पुरानी समस्या का किया समाधान

मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर/ सरकारें गांवों के विकास के लिए करोड़ों रुपए खर्च करने का दावा करती हैं, वहीं आज भी कई गांव ऐसे हैं जहां मूलभूत सुविधाओं का घोर अभाव है।

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ऐसे में ग्राम पंचायत जोलगी में सरपंच शकुंतला सिंह और उपसरपंच जगदीश प्रसाद भुर्रतिया ने एक मिसाल पेश करते हुए अपने स्वयं के व्यय पर सीसी रोड का निर्माण करवा कर न केवल जनप्रतिनिधित्व की नई परिभाषा गढ़ी है, बल्कि वर्षों से जूझ रहे ग्रामीणों को राहत की सांस भी दी है।

भरतपुर विकासखंड अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत जोलगी के छपरा टोला में बरसात के दिनों में सड़कें दलदल में तब्दील हो जाती थीं। यही नहीं, उस दलदली रास्ते से ग्रामीणों को खेतों तक पहुंचने में काफी दिक्कत होती थी, स्कूली बच्चों को गिरने और फिसलने की चिंता बनी रहती थी और मवेशी भी इस दलदल में फंसकर जान गंवा बैठते थे। ऐसी विकट स्थिति में, सरपंच और उपसरपंच ने मिलकर तय किया कि अब इस समस्या का स्थायी समाधान किया जाएगा — बिना सरकारी फंड के, अपने स्वयं के खर्च पर।

समस्याओं से निजात दिलाने सीसी रोड बना उदाहरण

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ग्रामपंचयत जोलगी के छपरा टोला में लगभग 25 से 30 घर हैं। ग्रामीण अमर बहादुर और जयबीर सिंह ने बताया कि पहले रास्ता इतना खराब था कि पहाड़ से बहकर आने वाला पानी पूरे मार्ग को कीचड़ में तब्दील कर देता था। स्कूली बच्चे कीचड़ में गिरकर गीले हो जाते थे, जिससे कई बार वे स्कूल नहीं जा पाते थे। लेकिन अब जब से सीसी रोड बन गया है, लोगों को चलने में सहूलियत हो रही है और बच्चों को भी स्कूल आने-जाने में कोई दिक्कत नहीं हो रही।

विकास कार्यों के लिए व्यक्तिगत योगदान की परंपरा

उपसरपंच जगदीश प्रसाद भुर्रतिया का यह योगदान कोई पहला अवसर नहीं है। वे पांचवीं बार उपसरपंच बने हैं और हर कार्यकाल में अपने निजी व्यय पर एक न एक निर्माण कार्य ग्राम पंचायत को समर्पित करते आए हैं। अपने पहले पंचवर्षीय में उन्होंने ग्राम लाखनटोला में बजरंगबली मंदिर तक सड़क बनवाया, दूसरे पंचवर्षीय में तरतोरा गांव में हरफर नाला से बंधा तक रोड निर्माण कराया। चौथे पंचवर्षीय में उन्होंने कमलनरायन के घर से तरतोरा तक 300 मीटर सीसी रोड बनवाया, जो वर्षों से लंबित था। अब पांचवे कार्यकाल में उन्होंने छपरा टोला के बैगापारा क्षेत्र में लगभग 30 मीटर लंबी सीसी रोड का निर्माण करवा कर ग्रामीणों को बरसात की त्रासदी से मुक्ति दिलाई है।

उन्होंने बताया कि बरसात में इस क्षेत्र की हालत सबसे ज्यादा खराब हो जाती थी। लोगों को चलने-फिरने में बेहद कठिनाई होती थी और बच्चे स्कूल जाने के बजाय घर में बैठने को मजबूर हो जाते थे। इस समस्या को गंभीरता से लेते हुए उन्होंने यह निर्माण कार्य कराया और ग्रामवासियों को यह सौगात दी।

सरपंच शकुंतला सिंह की भी रही सक्रिय भूमिका

ग्राम पंचायत जोलगी की महिला सरपंच शकुंतला सिंह ने बताया कि इस सीसी रोड के निर्माण में शासकीय फंड का कोई उपयोग नहीं किया गया है। यह कार्य उपसरपंच जगदीश भुर्रतिया के आर्थिक सहयोग और निजी इच्छाशक्ति से पूरा हुआ है। उन्होंने भी इस पहल में सक्रिय भूमिका निभाई और कार्य को सुचारू रूप से संपन्न कराने में सहयोग किया।

ग्रामवासियों ने जताया आभार, कहा— जनप्रतिनिधियों से यही उम्मीद होती है

ग्रामवासियों ने सरपंच और उपसरपंच की इस पहल की जमकर सराहना की है। ग्रामीणों ने बताया कि सरकारें बड़े-बड़े वादे करती हैं, पर जमीनी सच्चाई कुछ और ही होती है। लेकिन जब स्थानीय जनप्रतिनिधि खुद आगे आकर समस्याओं का समाधान करें, तो वह सच्ची सेवा मानी जाती है। उपसरपंच जगदीश भुर्रतिया की इस निःस्वार्थ पहल से यह साबित होता है कि विकास सिर्फ योजनाओं से नहीं, बल्कि इच्छाशक्ति और सेवा भावना से भी संभव है।

प्रेरणा बन सकते हैं ऐसे जनप्रतिनिधि

जगदीश भुर्रतिया की यह पहल न सिर्फ ग्रामीण विकास की मिसाल है, बल्कि अन्य जनप्रतिनिधियों के लिए भी प्रेरणा है कि यदि वे चाहें तो बिना सरकारी बजट का रोना रोए भी, अपने क्षेत्र में विकास कार्य कर सकते हैं। ऐसी सोच और सेवा भाव ही लोकतंत्र की असली ताकत है।

ग्राम पंचायत जोलगी की यह कहानी बताती है कि अगर जनप्रतिनिधि ईमानदार हों और वाकई अपने गांव की भलाई चाहते हों, तो किसी भी समस्या का समाधान असंभव नहीं है।

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