कोरिया

शिक्षक अब नहीं पोस्ट करेंगे फुहड़रील, फोटोग्राफ्स

जिला शिक्षा अधिकारी ने जारी किया निर्देश

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एस0 के0 रूप

बैकुण्ठपुर / विद्यालय शिक्षा का मंदिर होता है प्रतिवर्श बसंत उत्सव के अवसर पर पंचमी तिथि में मां शारदेय की वंदना प्रमुख रूप से विद्यालयों में कि जाती है। विद्यालय विद्या + आलय दो शब्दों से मिलकर बना है जो विद्या के स्थान के रूप में सुशोभित है, जहां विद्या है वहां प्राचीनकाल, वैदिककाल, गुरूकुलकाल से मां सरस्वती का स्वतः निवास माना जाता है क्योंकि यही विद्या और बुद्धि की आदिदेवी के रूप में पूजित होते आई है। सभ्यता और संस्कृति को नकारने वाले भारतीय संस्कृति विरोधी आने वाले भविष्य को कैसे समृद्धशाली बना पायेंगे यह बड़ी चुनौती है। वर्तमान में शिक्षक अपने दायित्व और कर्तव्य को भूल रहे है।

w-247x300 शिक्षक अब नहीं पोस्ट करेंगे फुहड़रील, फोटोग्राफ्स

कम उम्र में वरियता के आधार पर शिक्षकों की संविदा नियुक्ति हो गई है जो नैतिक सदाचार के दायरे में खुद ही नहीं तो विद्यार्थियों को क्या शिक्षित करेंगे शिक्षा का दायरा केवल एबीसीडी तक ही सीमित नहीं है। शिक्षकों का दायित्व नैतिक, सामाजिक, सांस्कृतिक एवं शारीरिक रूप से विद्यार्थियों को विकसित करना भी है। बीते दिनों कोरिया जिले स्थित विद्यालय में सोशल मीडिया में विभिन्न अमर्यादित व फूहड़ रील्स विद्यालय में ही बनाकर ट्रेंडिंग रील्स वायरल करने के लिए कुछ कर्मचारियों द्वारा बच्चों का भी इस्तेमाल किया गया। इस पर जिला शिक्षा अधिकारी कोरिया ने तत्काल संज्ञान लिया उन्होने सर्व विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी जिला कोरिया एवं सर्व प्राचार्य शासकीय हाई/हायर सेकेण्डरी स्कूल सेजेस जिला कोरिया सभी प्रधान पाठक पूर्व माध्यमिक शाला / प्राथमिक शाला जिला कोरिया।

जिला कोरिया को निर्देश जारी किया

जिसमें उल्लेखित है कि वर्तमान समय में शिक्षकों द्वारा सोशल मीडिया पर विभिन्न प्रकार के रील पोस्ट किए जा रहे है। जिसमें कई अमर्यादित तथा अस्वीकार्य है इससे अप्रिय स्थिति निर्मित हो रही है। अतः आप अपने अधिनस्थ समस्त शिक्षको को कड़े निर्देश जारी करे कि उनके द्वारा शिक्षा, शिक्षण एवं शैक्षिक गतिविधियों के अलावा किसी भी प्रकार के रील, फोटोग्राफ्स आदि पोस्ट न किये जाये। निर्देश का पालन न किए जाने पर उनके विरूद्ध सीविल सेवा आचरण अधिनियम 1965 नियम 9 के अधीन अनुशासनात्मक कार्यवाही की जायेगी।
कुछ ऐसे पद होते है जो व्यक्तिगत होकर भी सार्वजनिक महत्व रखते है शिक्षक का दायित्व बड़ा है। शिक्षक को व्यक्तिगत रूप से मर्यादित होना चाहिए तभी तो आने वाली पीढ़ी को शिक्षित कर सकेगा । फिर विद्यालयों में विद्यार्थियों के साथ फुहड़रील या अमर्यादित पोस्ट डालना शोभनीय नहीं है क्षेत्र की जनता एवं अभिभावको ने जिला शिक्षा अधिकारी को धन्यवाद ज्ञापित किया।

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