छत्तीसगढ़

साहित्यकार सतीश की लघुकथा ,का प्रकाशन राष्ट्रीय संकलन में

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मनेद्रगढ़/ हर व्यक्ति के जीवन में मां का स्थान सबसे ऊंचा होता है ।इस भावनात्मक संबंध को शब्दों में पिरोना कोई आसान काम नहीं। राष्ट्रीय स्तर पर इंदौर से प्रकाशित कथा संकलन का महत्व तब और बढ़ जाता है जब डॉ मोहन यादव मुख्यमंत्री मध्य प्रदेश, नरेंद्र सिंह तोमर अध्यक्ष विधानसभा मध्य प्रदेश ,पंडित प्रदीप मिश्रा अंतरराष्ट्रीय कथा वाचक ,पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री पीठाधीश्वर श्री बागेश्वर धाम सरकार ,प्रहलाद सिंह पटेल पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री मध्य प्रदेश , आदि प्रमुख व्यक्तियों के संस्मरणों के साथ , मनेद्रगढ़ के वरिष्ठ साहित्यकार एवं हिंदी साहित्य समिति के जिला प्रभारी सतीश उपाध्याय की जीवंत लघुकथा का प्रकाशन भी हिंदुस्तान के प्रमुख रचनाकारों के नाम के साथ सम्मिलित किया जाता है। वरिष्ठ साहित्यकार और लघु कथा लेखक चैतन्य त्रिवेदी, डॉ पदमा सिंह पूर्व विभाग अध्यक्ष, भाषा अध्ययनशाला केंद्र , डॉ अरुण सराफ प्राध्यापक के संपादन(जूरी) एवं सारंग क्षीरसागर के रेखांकन में ए यूनिट आफ जागरण प्रकाशन लिमिटेड द्वारा प्रकाशित लघु कथा संकलन में , कलापनी कोमकली, शास्त्री गायिका कुमार गंधर्व की बेटी, अनूप जलोटा, उदय दाहिया स्टैंड अप कॉमेडियन, मनीष शंकर शर्मा आईपीएस अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक मध्य प्रदेश,, ऐश्वर्या खरे टीवी एक्ट्रेस, मेघा परमार माउंट एवरेस्ट पता करने वाली मध्य प्रदेश की पहली महिला, राजीव वर्मा फिल्म अभिनेता, गोविंद नामदेव फिल्म अभिनेता,, अशोक ध्यान चंद्र पूर्व भारतीय हॉकी खिलाड़ी, सुप्रसिद्ध वरिष्ठ साहित्यकार गिरीश पंकज रायपुर, सहित -म से मां -“लघुकथा संकलन में हिंदुस्तान के 162 लघु कथा लेखकों की लघु कथा संकलित की गई है।
राष्ट्रीय स्तर की प्रमुख पत्र -पत्रिकाओं में निरंतर लेखन धर्म निभाने वाले वरिष्ठ साहित्यकार सतीश उपाध्याय ने लघु कथा संकलन में प्रकाशित प्रस्तावना के संबंध में बताया कि संकलन के प्रत्येक लघु कथा जीवन के सबसे अनमोल भावनात्मक अनुभवों को उजागर करती है। हर मां अपने बच्चों के लिए पहली गुरु , और जीवन की सबसे बड़ी प्रेरणा स्रोत होती है ,मां के प्रेम त्याग और बलिदान की कहानी हमें यह सिखाती है कि सच्चे प्रेम की कोई सीमा नहीं होती. मां के बलिदान अक्सर दृष्टि गोचर नहीं होते लेकिन उनका प्रभाव जीवन भर होता है। संकलन की प्रस्तावना की उल्लेखनीय पंक्तियों को रेखांकित करते हुए सतीश उपाध्याय ने कहा -मां वह धागा है जो पूरे परिवार को एक साथ बांधकर रखती है उनकी उपस्थिति मात्र एक बच्चे के जीवन में न केवल शारीरिक बल्कि मानसिक और भावनात्मक संबल का स्रोत होती है बच्चा चाहे कितना उम्र दराज हो जाए मां के लिए वह नन्हा बच्चा ही रहता है। लघु कथा संकलन में इंदौर, लखनऊ ,खरगोन, भोपाल ,उज्जैन ,नीमच, रायपुर, झाबुआ, जावरा ,देवास, अलीराजपुर ,भिंड, जबलपुर ,मनेद्रगढ़ ग्रेटर नोएडा ,उमरिया, बड़वानी, टीकमगढ़ अजमेर, दिल्ली, भोपाल ,बदनावर मालवा, गरियाबंद, आदि लेखकों की चयनित लघु कथाओं का संकलन किया गया है। लघु कथा के संकलन में सम्मिलित लघुकथा के लिए, स्थानीय साहित्यकारों एवं योग समिति के पदाधिकारी ने इसे साहित्य के पन्नों में अमिट हस्ताक्षर कहा है।

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