पत्रकारिता – समाज सेवा हावे या बेरोजगार जवान मन के धंधा?
पत्रकारिता – समाज सेवा हावे या बेरोजगार जवान मन के धंधा?

पत्रकारिता – समाज सेवा हावे या बेरोजगार जवान मन के धंधा? 
आज के समय म एक बात खूब पूछे जात हे – पत्रकारिता सच म समाज सेवा हावे या फेर ये सिरिफ बेरोजगार जवान मन के रोजी-रोटी के साधन बन गे हे?
पुर जबाना म पत्रकारिता ला सेवा माने जाथे। महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, लाला लाजपत राय जइसने महापुरुष मन अपन कलम के जोर ले देश के लड़ई ल लड़िन। ओ समय म पत्रकार बनना मतलब समाज खातिर लड़ई ल लड़ना रहिस।
पर आज के समय म सोशल मीडिया, यूट्यूब, व्हाट्सऐप जइसन प्लेटफार्म के आघू, पत्रकारिता आसान हो गे हे। अब हर कोनो मोबाइल वाला मन अपन आप ल पत्रकार कहे लग गे हे। कइसे-कइसे फर्जी कार्ड बनाके, छोट-बड़ समाचार बनाके, कोनो-कोनो तो ब्लैकमेलिंग घलोक करे लग जाथे।
अब सवाल ये उठथे – का पत्रकारिता बेरोजगार जवान मन के धंधा बन गे हे?
एक हिसाब ले देखन त हाँ – काबर के रोजगार के कमी, सरकारी नौकरी नइ मिल पाना, अउ मोबाइल इंटरनेट के सहारा ले कई जवान मन मीडिया म आ गे हे। पर ए म सब झन खराब नइ हे। कई सच्चे मन घलोक हावे जेन मन गाम-गाम के समस्या, गरीब जनता के आवाज सरकार तक पहुँचात हे।
पत्रकारिता ल समाज सेवा म बनाय राखे खातिर का जरूरी हे?
1. **सच्चाई अउ निष्पक्षता:** झूठ नइ चले, जे होवय ओही ल लिखे।
2. **प्रशिक्षण अउ समझदारी:** पत्रकार बने के पहिली थोड़ा प्रशिक्षण घलोक जरूरी हे।
3. **मान्यता अउ नियम:** सरकार ले मान्यता, संगठन के सदस्यता जरूरी हे।
4. **ब्लैकमेलिंग के खिलाफ कार्रवाई:** फर्जी पत्रकार मन ऊपर कड़ाई बरतना जरूरी हे।
### **निष्कर्ष म कहिबो त –**
> “पत्रकारिता सेवा घलोक आय, व्यवसाय घलोक। बात ये आय कि कोन भावना ले पत्रकारिता करे जात हे – अगर सच्चाई खातिर, जनता के भलाई खातिर होवय, त वो समाज सेवा आय। अउ झूठ, डर अउ धमकी खातिर होवय, त ओ धंधा के हिस्सा बन जाथे।”

