
सतीश मिश्रा
मनेन्द्रगढ़/ वनमंडल के कुँवारपुर वन परिक्षेत्र के कुदरा बीट में वन्य प्राणी के लिए जैव विविधता संरक्षण के तहत पहाड़ों व जंगलों में पानी की तलाश में वन्यप्राणीयो को कहीं भटकना न पड़े और जंगल को छोड़ कर रहाइशी इलाकों की ओर रुख न कर सके इसके लिए वन विभाग के द्वारा जलाशय का निर्माण कराया गया था जहा वन्य जीवों को जंगल में बनाए गए तालाब से पानी मिल सके ताकि गर्मी के दिनों में वन्य जीवों को पानी की तलाश में भटकना ना पड़े। लेकिन वन विभाग के द्वारा बनाए गए जलाशय पहली ही बारिश में दम तोड दिया । यह इस कदर भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गया के वन्य प्राणी को पानी के तलास में रहाईशी इलाको की ओर जाना पड़ता है जिससे कि आए दिन वन्यप्राणियों के द्वारा कई हादसा सुनने को और देखने को मिलते रहता है।

वन मंडल मनेंद्रगढ़ के वनपरिक्षेत्र कुंवारपुर में इन दिनों अधिकारी भ्रष्टाचार के नित नए अध्याय लिख रहे हैं जहां कुँवारपुर वन परिक्षेत्र के कुदरा बीट में गर्मी के मौसम में वन्यजीवों के पानी पीने के लिए तालाब का निर्माण कराया गया था जो अब भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है।

वन्य प्राणियों के लिये शासन द्वारा जारी किये गये राशि को गुणवत्ता हीन निर्माण कार्य कर राशि को गबन किया गया है। जब निर्माण कार्य कराया जाता है तो उससे पहले निर्माण कार्य का बोर्ड उस जगह पर लगाना अनिवार्य होता है जिससे पता चल सके की जो तालाब इस जगह पर बनाया गया है वह कौन से मद कौन से योजनाओं के तहत और कितने की लागत में इस तालाब को बनाया जा रहा है लेकिन वन विभाग की भ्रष्टाचारियों को देखते हुए अपने मनमौजी से जैसे तैसे निर्माण कार्य कर दिया गया और पैसे का आहरण कर लिया गया इससे साफ जाहिर होता है की वन विभाग द्वारा किसी भी कार्य के बारे में किसी को जानकारी न हो सके यह सोचकर कारनामा कर इस कदर कार्यों को कर अधिकारी भ्रष्टाचार में लिप्त होते जा रहे है।

वन विभाग में निर्माण कार्य का पूरा लेखा जोखा अधिकारियों को ही देखना होता है। चाहे डब्लू बीएम सडक निर्माण, रपटा, पुल पुलिया, स्टाप डेम या कोई भी निर्माण कार्य हो वनविभाग के अधिकारी ही इन कार्यों का ठेकेदार से लेकर इंजीनियर तक सर्वेसर्वा होता है। इसलिये इन्हे किसी बात का कोई डर नहीं होता है क्योंकि वन विभाग के अधिकारियों को यह बात अच्छे से पता है की अगर हमारे द्वारा कराए गए कार्यों की सत्यापन करने वाले तो हम ही है।
अगर कराए गए कार्यों पर कोई गड़बड़ी दिखती है या कुछ खुलकर सामने आता है तो उस काम को दोबारा मरम्मत के नाम पर योजना के तहत फिर से राशि निकाली जा सकती है मनेंद्रगढ़ वनमंडल के वन पऱिक्षेत्र कुंवारपुर में जंगल राज कानुन लागु है यह कहना गलत नहीं होगा।
रामनरेश यादव ग्रामीण ने बताया कि दुलही दह में जलासय बनाया गया डैम टाइप का जो हल्के बरसात में फुट फाट के बराबर हो गया गर्मी में सूखा था अगर पानी रहता तो मवेशी पीते इसका जांच करने वाला कोई नही है।
वहीं का दूसरा ग्रमीण गणेश ने कहा कि वन्यजीवों के लिए रेंजर के द्वारा जलाशय का निर्माण करवाया गया जो पहली बरसात में बह गया, निर्माण में जो मानक सामग्री उपयोग करना था उपयोग नहीं किया गया है, सरासर शासन के पैसे का दुरुपयोग हुआ है।
इस संबंध में जब हमने वन विभाग के उप मंडल अधिकारी से बात किया तो उनके द्वारा कहा गया कि जिस कदर से बताया जा रहा है कि जिस तालाब का निर्माण कराया गया था वह अभी बारिश में ही पूरी तरह से बह गया है अगर ऐसा कुछ है तो उस सुधारा जाएगा दोबारा से निर्माण कर दिया जाएगा ।
लेकिन एक शब्द भी अधिकारी ऐसा नहीं बोलते हैं कि अगर गड़बड़ी पाई गई तो उसे अधिकारी पर सख्त कार्रवाई की जाएगी क्योंकि अधिकारी ऐसा बोलने पर खुद भी फंस सकते हैं खुद भी भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं वन विभाग की ऐसे अधिकारी। जनता के पैसों का दुरुपयोग आखिर कब तक वन विभाग करेगा और उसके अधिकारी गबन अधिकारी के तौर पर कार्य करेंगे।



