सरगुजा संभाग

भीषण गर्मी में ग्रामीण अपने ईष्ट और कुल देव की करते है पूजा ताकि ना हो कोई प्रकोप और फसल हो बढ़िया

नौ तपा में 46 डिग्री के तापमान में संपन्न लोग एसी कूलर से नही हटते और ऐसे ही समय ये ग्रामीण करते है धरती पूजन कार्य

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सतीश मिश्रा

एमसीबी/ भरतपुर विकासखंड के ग्रामीण क्षेत्रो में किसी प्रकार की कोई रोग बाधा ना हो गांव में सुख शांति बरकरार रहे गांव के ही परंपरा के अनुसार अपने पूर्वजों की देवी देवताओं का सम्मान कर उनके रीति रिवाज के अनुसार पूजा पाठ कर अपने इष्ट देवता को मनाने के लिए गांव के सभी ग्रामीण इकट्ठा होकर धरती माता का पूजा किया।

f-7-300x180 भीषण गर्मी में ग्रामीण अपने ईष्ट और कुल देव की करते है पूजा ताकि ना हो कोई प्रकोप और फसल हो बढ़िया

मई जून के महीने में जैसे ही नौतपा शुरू होता है आदिवासी क्षेत्र के किसान अपने इष्ट देवता को मनाने के लिए अनेकों प्रकार का पूजा पाठ में लिन हो जाते हैं कड़कड़ाती धूप जहां निकलना भी दुभर है लेकिन इसी महीने के मई जून में जहां आसमान अंगारे की तरह बरस रहे हो इस तरह की धूप में आदिवासी ग्रामीण अपने पुरखों पूर्वजों के परंपरा को बरकरार रखने के लिए पूरे आदिवासी विधि विधान रिवाज से धरती पूजा करते हैं ग्रामीण बताते हैं कि हम इस पूजा को हम लोगों के पुरखों पूर्वजों ने धरती में जिस प्रकार की तपन होती है और आसमान से इतनी तेज धूप की किरणें पड़ती है जिससे आज के गोलों की तरह तपन होने लगता है

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जिससे गांव में अनेकों प्रकार की बीमारियां न ही सुखा न पड़े बारिश कम ना हो फसल नुकसान ना हो कुलदेवी के नाराज होने से गांव में किसी प्रकार की कोई संकट ना आ जाए इस बिपदा के लिए ग्रामीण इस पूजा को पूरे विधि विधान से करते हैं सारे किसान अपने घर से ही धन लेकर और कुछ खाने की समान लेकर गांव की एक ऐसे इलाके में जाते हैं जहां इनकी पूजा की जा सके और इस पूजा को गांव के ही एक बैगा के द्वारा किया जाता है और वह बैगा पूजा हो जाने के बाद सब के टोकरी में थोड़ा-थोड़ा धन डालकर उनका वापस घर में ले जाकर अपने धान की कुटिया में रखने को दे देता है।ग्रमीण
बच्चे लाल ग्रामीण बताते हैं कि हमारे जो पुरखा बुजुर्ग से उनके द्वारा गांव में देवी – देवता बैठक पूजा करवाते थे मई जून में ही यह पूजा किया जाता है जिससे कि गांव की सुख शांति और आने वाले बारिश के समय में फसल बहुत अच्छे से हो हम लोग उनको इस पूजा के माध्यम से मानते हैं कि हमारी जो भी फसल हो बहुत अच्छी हो। वहीं टुप्पू सिंह ग्रामीण का कहना है कि जो धान लेकर आए थे उसे जो यहां पूजा किए हैं जो यहां का बैगा है। उनके द्वारा हमें कुछ धान वापस किया जा रहा है जिसे हम ले जाकर अपने घर में जहां धान रखा रहता है वहां रख देंगे जिससे हमारे घर में किसी भी चीज की कोई कमी ना हो।समर्थ ग्रामीण ने बताया कि आज यहां धरती पूजा किया जा रहा है इस पूजा को हमारे पूर्वज लोग के द्वारा देवी को मनाने के लिए करते थे और आज इस परंपरा को बरकरार रखकर हम लोग यहां पर कर रहे हैं जिससे हमारा खेती किसानी अच्छे से हो।

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