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सागर में मिट्टी की दीवार गिरने से 8 बच्चों की मौत, कई घायल…

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सागर / मध्य प्रदेश के सागर जिले के शाहपुर में एक दुखद घटना में मिट्टी की दीवार गिरने से 8 बच्चों की मौत हो गई है, जबकि कई अन्य बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। यह हादसा तब हुआ जब बच्चे मिट्टी के शिवलिंग बनाने के लिए एकत्रित हुए थे और अचानक एक मिट्टी की दीवार उनके ऊपर गिर गई।

हरदौल मंदिर में शिवलिंग निर्माण और भागवत कथा का आयोजन चल रहा था। रविवार, 4 अगस्त को भी शिवलिंग बनाने का कार्य जारी था। अवकाश के दिन होने के कारण, 8 से 14 साल के कई बच्चे भी वहां शिवलिंग बनाने के लिए पहुंचे थे। शिवलिंग निर्माण के दौरान अचानक मंदिर परिसर के पास स्थित करीब पचास साल पुरानी एक कच्ची दीवार गिर गई, जिससे यह दुखद हादसा हुआ।

कैसे हुआ हादसा:
हरदौल मंदिर में सावन के महीने में रोज़ाना सुबह से शिवलिंग बनाए जा रहे थे। रविवार को छुट्टी का दिन था, इस वजह से 8 से 14 साल के कई बच्चे भी बड़ी संख्या में वहां मौजूद थे। बच्चे जब शिवलिंग बना रहे थे, तभी मंदिर के पास की करीब पचास साल पुरानी एक कच्ची दीवार अचानक भराभराकर गिर गई। दीवार सीधे उन बच्चों के ऊपर गिरी जो शिवलिंग बना रहे थे। इस हादसे में कई बच्चे दीवार के नीचे दब गए, जिसमें से आठ बच्चों की मौत हो गई।

मौके पर हंगामा:
इस घटना के बाद मौके पर चीख-पुकार मच गई और तत्काल ही दीवार के मलबे को हटाने का कार्य शुरू हुआ। नगर परिषद, पुलिस और स्थानीय निवासी राहत कार्य में जुट गए। यह दीवार मंदिर परिसर के बगल में स्थित थी और पिछले पचास वर्षों से जर्जर स्थिति में थी। इसके नवीनीकरण या हटाने की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। पिछले 24 घंटे में सागर में 104 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जिससे कच्चे और जर्जर निर्माणों पर प्रभाव पड़ा और इस दीवार के गिरने का खतरा बढ़ गया।

अस्पताल में व्यवस्था की कमी से हंगामा:
हादसे के बाद घायलों को आनन-फानन में अस्पताल लाया गया, लेकिन वहां डॉक्टर मौजूद नहीं मिले, केवल एक कर्मचारी मौजूद था। स्थानीय निवासियों ने इस पर जमकर हंगामा किया। लोगों ने आरोप लगाया कि डॉक्टर अक्सर आते हैं और सिर्फ साइन करके चले जाते हैं। अस्पताल में घायल बच्चों की मरहम-पट्टी करने वाला भी कोई नहीं था, जिससे लोगों का गुस्सा और भी बढ़ गया।

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यह घटना बहुत ही दुखद है और प्रशासन को इस प्रकार की घटनाओं से बचने के लिए जर्जर दीवारों और इमारतों की समय-समय पर जांच और मरम्मत की व्यवस्था करनी चाहिए। प्रशासन को अस्पतालों में भी उचित व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि घायल लोगों को समय पर इलाज मिल सके।

 

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