
सतीश मिश्रा
जनकपुर/ एमसीबी जिले के विकासखण्ड भरतपुर के दूरस्थ वनांचलक्षेत्र ग्रामपंचायत ठिसकोली में सचिव महाशय जब से पदस्थ है तब से ग्राम पंचायत में नहीं आते जिसको लेकर ग्रामीण आक्रोशित हैं।
मिली जानकारी के अनुसार ग्रामपंचायत ठिसकोली ब्लॉक मुख्यालय से लगभग 65से70 किलो मीटर की दूरी मे है और इनदिनों छत्तीसगढ़ शासन शाला प्रवेश उत्सव मना रही है और नए बच्चो का एडमिशन होना है इसके लिये बच्चो को निवास प्रमाणपत्र,आय, जाती प्रमाण पत्र की आवश्यक्ता होती है जो ग्रामपंचायत के सचिव एवम सरपंच के द्वारा बनाया जाता है लेकिन बिडंबना यह है कि यहां सचिव की जब से पदस्थापना हुई है तब से अबतक सचिव को ग्रामीणों के द्वारा देखा ही नहीं गया है जिसके कारण ग्रामीणों को कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ता है ग्राम पंचायत से नदारत रहने से शासन के कई जनकल्याण कारी योजनाओ से ग्रामीणों को जानकारी नहीं होने से योजनाओ का लाभ नही मिल पता है कार्यालय में सचिव के न रहने से कई शासकीय कामकाज प्रभावित हो रहे है। कई लोगों को पात्रता पर्ची, राशन कार्ड सहित अन्य योजनाओं के कार्यों के लिए पंचायत के चक्कर लगाना पड़ रहा है। पंचायत कार्यालय में सचिव के नहीं मिलने से ग्रामीणों में रोष है।
पंचायत भवन के कम्प्यूटर कक्ष में महीनों से ताला लगा रहता है। पंचायत संबंधी आनलाइन कार्य बाजार से पैसे देकर ग्रामीणों को करवाना पड़ रहा हैं। ग्रामीण छत्रपति सिंह, सोनू सिंह ने बताया कि कुछ फार्म में संशोधन के लिए परेशान हो रहा हूं। कभी साइट बंद रहता है और सचिव नहीं मिलते। काम कराने के लिए सरपंच के घर जाना पढ़ता है कोई भी ऑनलाइन कार्य के लिये निजी सेवा केंद्रों में जाना पड़ता हैं। जिसके लिये हमको पैसा देना पड़ता है जब इसके बारे में सरपंच ग्रामपंचायत ठिसकोली से पूछा तो सरपंच के द्वारा गोलमाल जवाब देकर सचिव का बचाव करते कहा गया कि कभी कभार आते हैं वही
ग्रामीण गोलीचंद से बात करने पर उसने बताया कि जब से नया सचिव ग्रामपंचायत में पदस्थापना हुई है तब से उसकी जानकारी ही नहीं है वो नदारत ही रहते है।
उसी ग्रामपंचायत के वार्ड क्र.4 के पंच कुम्हेरसिंह मरकाम के द्वारा बताया कि सचिव लगभग 3-4 माह से ग्रामपंचायत नहीं आया है जब हमारे द्वारा पूछा गया कि इस समय बच्चो का एडमिशन चालू है इसके लिये आय, जाती,निवास प्रमाण पत्र की आवश्यक्ता होती है तो क्या करते हो तब पंच के द्वारा बताया गया कि परेशान होना पड़ता है सचिव को खोजना पड़ता है ब्लॉक का चक्कर कटना पड़ता है लेकिन वहां भी अगर मिले तो मिले अन्यथा वापस
आगये।
जब हमारे द्वारा जनपद पंचायत के मुख्यकार्यपालन अधिकारी से बात हुई और इसकी जनकारी दी गई तो उनके द्वारा बोला गया कि देखते हैं।
अब सवाल यह उठता है कि जब मुख्यकार्यपालन अधिकारी ही कह रहे हैं की देखता हूँ तो पता नही आगे क्या होगा इस तरह के सचिवों के भरोसे कैसे ग्राम पंचायत चलेगा और ग्रामपंचायत से ही शासन की जनकल्याणकरी योजनाओं का संचालन होता है। देखना यह है के उच्चाधिकारी सचिव पर क्या करवाई करते है।



