कोसम कार्यक्रम का आयोजकों की खुली पोल
कोसम कार्यक्रम में अभिव्यक्ति के कुछ पदाधिकारी की बड़ी धांधली उजागर

संवाददाता
कोरिया / कोरिया साहित्य महोत्सव (कोसम) कार्यक्रम में आयोजक टीम अभिव्यक्ति द्वारा भर्राशाही बरती गई है और इनके आयोजकों में कोरिया जिला पंचायत का एक पीआर ओ बड़ी भूमिका में है। यह वही पीआरओ जिसे लेकर कई विवाद भी देखने को मिले हैं जिससे तात्कालीन सीईओ ने झुमका महोत्सव में आयोजन को लेकर खरी खोटी सुनाई थी लेकिन बावजूद इनमें कोई सुधार देखने को नही मिला है। ताजा मामला साहित्य से जुड़े कार्यक्रम को लेकर है जहां कोसम पार्ट वन में इनके द्वारा कोषाध्यक्ष का अधिकार स्वयं अपने पास रख लिया गया था और कार्यक्रम में प्राप्त धनराशि में हेराफेरी की थी जिसे लेकर कोषाध्यक्ष नें आपत्ति उठाई थी और हिसाब करने को कहा था पूर्व के लेनदारों के पैसे आज 1 वर्ष हो गए नहीं मिले और कोसम पार्ट 2 पुनः लांच कर दिया गया है जिसमें भी टीम अभिव्यक्ति पुनः बागडोर अपने हांथ में ले ली है । विगत दिनों कोरिया जिला पंचायत का पीआर ओ एवं पटवारी दोनों मिलकर बैंक से जाकर 20000 रूपये भी बिना पहले खाते धारक कोषाध्यक्ष को सूचना दिए एवं बैंक को उसके विषय मे गलत जानकारी बताकर आहरण कर लिये हैं जबकि कोषाध्यक्ष को जानकारी देनी अनिवार्य है। बैंक खाते तीन व्यक्तियों के नाम से खोला गया था जिसमें खाता खोलते समय प्राथमिक व्यक्ति कोषाध्यक्ष के पास अधिकार सुरक्षित थे एवं पूर्व के बकायादारों का हिसाब करना था इसी राशि मे से संस्था के एक कर्मठ पदाधिकारी का 15000 पंद्रह हजार रूपये भुगतान किया जाना था उसे निकाल कर अपने पास रख लिए हैं। इन दोनों ने मिलकर कोषाध्यक्ष को बगैर जानकारी दिए पैसे निकाल लिए जो बड़ी धांधली है।
कोसम पार्ट 1 के कई प्रतिभागियों को नहीं मिला स्मृति चिन्ह व सम्मान –
टीम अभिव्यक्ति द्वारा कोसम पार्ट 1 में कई प्रतिभागियों को स्मृति चिन्ह एवं प्रशस्ति पत्र नहीं दिया गया उसे अपने घर ले जाकर रख लिए और जो प्रतिभागी नहीं रहे उन्हें बांटकर वाहवाही लूट लिया गया । छत्तीसगढ़ राज्योत्सव में द्वितीय स्थान लाकर कोरिया जिले की गरिमा बढ़ाने वाले के साथ भी मुंहदेखी की गई और प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह नहीं दिया गया ।
पार्ट 1 की पुस्तकें भी अप्राप्त:
कोसम पार्ट 1 में छपी पुस्तक आज तक कई लोगों को अप्राप्त है जबकि कई साहित्कार पुस्तक मांगते रहे लेकिन आज तक उन्हे प्रदान नहीं किया गया है वहीं कोसम पार्ट 2 के आवरण पृष्ठ में झूुठा कथन किया गया है जिसमे लेख किया गया है कि ‘‘ इस दौरान हमनें क्षेत्र का विस्तार करते हुए छत्तीसगढ़ के साहित्य कर्मियों की रचनाओं को संकल्पित करने का अभिनव प्रयोग किया है जो बता रहा है कि अभिव्यक्ति के द्वारा झूठा कथन करने में कोई भय नहीं है। क्योंकि पूर्व में ही कई साहित्यकार छत्तीसगढ़ स्तर पर अन्य कर्मठ पदाधिकारियों के प्रभाव से आए है और पुस्तक में भी उनकी रचनाएं शामिल रही है।
वरिष्ट साहित्यकारों की उपेक्षा –
विगत कोसम पार्ट-1 में अभिव्यक्ति द्वारा स्थानीय साहित्यकारों की घोर उपेक्षा बरती गई कई वरिष्ट साहित्यकारों को नही आमंत्रित किया गया जबकि साहित्य से जुड़े व्यक्तियों को शुद्ध मन से सबके साथ समान व्यवहार रखना चाहिए जो इनके द्वारा नहीं किया गया है। जानकारी के अनुसार कुछ साहित्यकारो गजलकारों को छोड़कर अहंकार के वशीभूत कार्य कर रहे हैं।
टीम अभिव्यक्ति के वरिष्टजनों से नहीं लेते हैं सलाह –
इनके विषय में यह भी बताया गया है कि अभिव्यक्ति संस्था के वरिष्टजनों से कोई सलाह एवं विचार विमर्श नहीं लिया जाता है केवल दो लोग जिसमें जिला पंचायत का पीआरओ एवं पटवारी दोनो मिलकर ही संस्था चला रहे हैं जो किसी भी प्रकार से संस्था के नियमों के अधीन नहीं है ।
ऐसे आयोजन साहित्य जगत के लिए धब्बा –
कोरिया जिला जो अपने साहित्यिक गतिविधियों के लिए विश्व विख्यात है ऐसे पवित्र धरती पर साहित्य गतिविधियों में भ्रष्टाचार धांधली छल कपट होना उसके लिए धब्बा साबित हो रहा है इसलिए साहित्य प्रेमियों को ऐसे आयोजन से सदा किनारा कर लेना चाहिए ताकि भविष्य में ऐसे अहंकार व चालाकी पूर्ण कार्य करने वाले व्यक्तियों के कार्यों में वे भी सम्मिलित ना हो।



