भरतपुर अंतर्गत आजन्म दिव्यांग राजकुमार खैरवार की कहानी: मैं अपाहिज हूं मुझे कोई सुविधा नही है साहब

सतीश मिश्रा
मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर/ दिव्यांग राजकुमार खैरवार की कहानी एक संघर्षपूर्ण जीवन की कहानी है। वह पैदाइशी दिव्यांग है और दोनों पैरों से विकलांग है। इसके बावजूद, वह अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है। राजकुमार खैरवार ने बताया कि उन्हें सरकार या प्रशासन की तरफ से कोई भी सुविधा नहीं दी जा रही है। उन्होंने कई बार प्रशासन से सहायता मिलने की मांग की, लेकिन उन्हें यह कह कर वापस लौटा दिया गया कि अगले महीने काम कर दिया जाएगा।

राजकुमार खैरवार को ट्राई साइकिल और अन्य सुविधाएं नहीं मिली हैं। उन्होंने बताया कि ट्राई साइकिल मिलने से वे खुद ही हर जगह जा सकते हैं और परिवार के सदस्यों को अपना काम छोड़ कर उनके साथ नहीं जाना पड़ेगा। राजकुमार खैरवार ने सरपंच से भी इस मामले को लेकर बात की थी, जिसके बाद ट्राई साइकिल दिलवाने के लिए सरपंच ने फॉर्म भी भरवा दिया था, लेकिन अभी तक ट्राई साइकिल नहीं मिली है।

उन्होंने बताया कि कुछ सालों पहले जब एमसीबी जिले में ट्राई साइकिल बांटी जा रही थी, तब भरतपुर के भूतपूर्व विधायक गुलाब कमरों ने आश्वासन दिया था कि अवश्य ट्राई साइकिल दी जाएगी। लेकिन इसके बावजूद भी राजकुमार खैरवार को ट्राई साइकिल नहीं मिली है और न ही विधायक ने उसके बाद इस परिवार की कोई मदद की है। यह देखकर लगता है कि विधायक के आश्वासन और वास्तविक कार्रवाई में काफी अंतर है। राजकुमार खैरवार को अभी भी ट्राई साइकिल और अन्य आवश्यक सुविधाओं की आवश्यकता है, लेकिन लगता है कि उन्हें इन सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है। नहीं है घर में शौचालय जिसके चलते शौच के लिए जंगल जाना पड़ता है, जो बहुत ही दयनीय स्थिति है।
सरकार द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों के लिए कई तरह की योजनाएं चलाई जा रही हैं। इनमें विकलांग पेंशन योजना भी शामिल है, जिसके अंतर्गत सरकार द्वारा ₹500 प्रति माह की धनराशि प्रदान की जाती है। इसके अलावा, दिव्यांगों को रोज़गार से लेकर उनकी दिव्यांगता से जुड़ी ज़रूरी सहूलियत प्रदान करने के लिए भी सरकार द्वारा कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।
राजकुमार खैरवार की समस्या का समाधान करने के लिए प्रशासन को तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए। उन्हें ट्राई साइकिल और अन्य सुविधाएं प्रदान की जानी चाहिए। इसके अलावा, प्रशासन को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि दिव्यांग व्यक्तियों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिले।
दिव्यांग राजकुमार खैरवार की कहानी एक संघर्षपूर्ण जीवन की कहानी है। वह पैदाइशी दिव्यांग है और दोनों पैरों से विकलांग है। इसके बावजूद, वह अपने जीवन को बेहतर बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है। प्रशासन को उनकी समस्या का समाधान करने के लिए तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए और उन्हें ट्राई साइकिल और अन्य सुविधाएं प्रदान करनी चाहिए।
ग्राम पंचायत जुईली के दिव्यांग राजकुमार खैरवार ने अपनी आपबीती सुनाते हुए बताया कि वह अपाहिज हैं और उन्हें किसी प्रकार की सहायता नहीं मिलती है। उन्होंने जनकपुर जनपद में आवेदन दिया था, लेकिन अभी तक उन्हें साइकिल भी नहीं मिला है। जब उन्होंने गांव के सरपंच से इस बारे में बात की, तो सरपंच ने कोई जवाब नहीं दिया। राजकुमार ने सरपंच से नौकरी दिलाने या किसी तरह की मदद करने का अनुरोध किया, लेकिन पुराने सरपंच देवशरण ने कहा कि उन्हें पेंशन मिलता है और इसलिए नौकरी की आवश्यकता नहीं है। नए सरपंच से भी उन्हें कोई मदद नहीं मिली है। राजकुमार की शादी नहीं हुई है और उनके पास जीने के लिए कोई सहारा नहीं है। उन्होंने प्रशासन से मदद की गुहार लगाई है।
मनमोहन बैगा ग्राम पंचायत जुईली के सरपंच ने कहा कि वह हाल ही में चुने गए हैं और अभी तक दिव्यांग राजकुमार खैरवार के दस्तावेज नहीं मिले हैं। जैसे ही उन्हें दस्तावेज मिलेंगे, वे अपने स्तर से प्रयास करेंगे और राजकुमार की मदद करने की कोशिश करेंगे। सरपंच ने आश्वासन दिया है कि वे राजकुमार की समस्या का समाधान करने के लिए काम करेंगे।



